1 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय विकास की अमेरिकी एजेंसी,
यूएसएड की प्रशासक हेनरियेटा फोर और ज़ियाद असाली, अमेरिकन चेरिटीज फॉर पैलेस्टाइन
के संस्थापक और अध्यक्ष ने वॉशिंगटन डी.सी में एक समझौते पर हस्ताक्षर किये ।
सुश्री फोर ने कहा, "यह
प्रबंध अपनी तरह का पहला मैकेनिज्म है और हमें इस ऐतिहासिक कदम पर बहुत गर्व है ।
अमेरिकन चैरिटीज फॉर पैलेस्टाइन अमेरिकी परोपकारी चंदा इकट्ठा करेगा और इस अनुदान
से क्षेत्र में जारी परियोजनाओं को सहायता देने के लिए यूएसएड के साथ मिलकर काम
करेगा ।"
यूएसएड-एसीपी भागीदारी यह सुनिश्चित करेगी कि
परोपकारी दान इस्राइल और भागीदारी के बीच शांति के विरोधियों के हाथों में न जाए ।
अमेरिकन चैरिटीज फॉर पैलेस्टाइन के अध्यक्ष असाली ने कहा, "एसीपी के जरिये और इस समझौते के परिणामस्वरूप उदार अमेरिकी फिलिस्तीनी विकास
के लिए इस भरोसे के साथ दान दे सकते हैं कि उनका पैसा अमेरिकी कानून के अनुसार,
उपयोगी परियोजनाओं को जाएगा ।" श्री असाली ने कहा कि पहला कदम उठा लिया गया है ।
उन्होंने कहा, "हमारा अगला कदम अपने मिशन को आगे ले जाने के लिए
सुदृढ़ प्रशासनिक और वित्तीय ढांचे को अंतिम रूप देना है ।"
निजी दान का इस्तेमाल मुख्य रूप से स्वास्थ्य और
शिक्षा परियोजनाओं के लिए किया जाएगा । यूएसएड प्रशासक हेनरियेटा फोर ने कहा, "चाहे यह हमारा आपात्कालीन चिकित्सा सहायता कार्यक्रम हो, मातृ एवं बाल
स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम हो, हमारी प्रारंभिक शिक्षा गतिविधियां हों या वे
शिक्षा परियोजनाएं हों, जो अमेरिकी-फिलिस्तीनी भागीदारी का हिस्सा हैं, यूएसएड
फिलिस्तीनियों की जिंदगियों को सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है ।"
श्री असाली ने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र
फिलिस्तीनी राष्ट्र की नींव का निर्माण करने के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो दो
राष्ट्रों- फिलिस्तीन और इस्राइल के साथ-साथ शांति और सुरक्षा में रहने के आधार पर
संघर्ष खत्म करने की परिकल्पनाओं का हिस्सा है ।
1993 से फिलिस्तीनियों को यूएसएड परियोजनाओं के
जरिये 2 अरब डॉलर से ज्यादा की अमेरिकी आर्थिक सहायता प्राप्त हुई है, जो किसी भी
अन्य दाता देश से मिली सहायता की तुलना में अधिक है । अमेरिकी विदेश मंत्री
कोंडोलीज़ा राइस ने कहा है, "अमेरिका के लिए उस फिलिस्तीनी राष्ट्र को अस्तित्व
में लाने में मदद करने से बड़ी विरासत कोई नहीं हो सकती, जिसके लोगों ने बहुत लंबे
समय तक संघर्ष किया है, जिन्होंने बहुत लंबे समय तक अपमान सहा है, जो लंबे समय तक
अपनी क्षमताओं का पूरा उपयोग नहीं कर सके हैं और जिनके पास अंतर्राष्ट्रीय समुदाय
को और हम सबको देने के लिए बहुत कुछ है ।"